वचन 8
वचन शब्द के जिस रूप से उसके एक या अनेक होने का पता चलता है, उसे वचन कहते हैं। वचन के भेद – ‘वचन’ का अर्थ संख्या से है। इस आधार पर वचन के दो भेद होते हैं 1. एकवचन 2. बहुवचन 1. एकवचन – शब्द के जिस रूप से एक ही प्राणी अथवा वस्तु का […]
लिंग 8
लिंग संज्ञा शब्द के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे लिंग कहते हैं। ‘लिंग’ का अर्थ है- चिह्न। लिंग संज्ञा का वह लक्षण है जो संज्ञा के पुरुषवाची या स्त्रीवाची होने का बोध कराता है। लिंग के भेद हिंदी भाषा में लिंग के दो […]
मुहावरे और लोकोक्तियाँ 8
मुहावरे और लोकोक्तियाँ भाषा को सुंदर और प्रभावशाली बनाने के लिए हम मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग करते हैं। इनके माध्यम से भाषा में कम-से कम शब्दों के प्रयोग से अधिक से अधिक भावों की अभिव्यक्ति की जा सकती है। मुहावरा ऐसा शब्द-समूह या वाक्यांश होता है जो अपने शाब्दिक अर्थ को छोड़कर किसी विशेष […]
भाषा, बोली, लिपि और व्याकरण 8
भाषा, बोली, लिपि और व्याकरण मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसे दूसरे लोगों के संपर्क में रहना पड़ता है। भाषा के बिना न तो वह अपनी बात समाज के दूसरे लोगों तक पहुँचा सकता है और न ही उनकी बात स्वयं समझ सकता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि भाषा मन के भावों या […]
पद परिचय 8
पद परिचय वाक्य में आए प्रत्येक पद अथवा किसी एक पद को पूर्ण व्याकरणिक परिचय देना पद परिचय कहलाता है। पद परिचय देते समय कुछ मुख्य बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है; जैसे पद परिचय 1. संज्ञा 2. सर्वनाम 3. विशेषण 4. क्रिया 5. क्रियाविशेषण 6. समुच्चयबोधक 7. विस्मयादिबोधक भेद, लिंग, वचन कारक क्रिया से उसका […]
क्रिया 8
क्रिया जो शब्द किसी कार्य के होने या करने अथवा किसी घटना के घटने, किसी व्यक्ति या वस्तु की स्थिति आदि का बोध कराते हैं, वे क्रिया कहलाते हैं; जैसे नेहा पढ़ रही है। ठंडी हवा चल रही है। परदा हिल रहा है आदि। क्रिया का अर्थ है- काम। जैसे आना, जाना, खाना, पीना, पढ़ना, […]
काल 8
काल क्रिया के जिस रूप से काम होने के समय का बोध हो, उसे काल कहते हैं। काल के भेद काल के तीन भेद होते हैं- भूतकाल वर्तमान काल भविष्यत काल 1. भूतकाल – बीते हुए समय को भूतकाल कहते हैं। जैसे- कल विद्यालय बंद था। बबीत ने खाना खाया। 2. वर्तमान काल – क्रिया के जिस […]
कारक 8
कारक संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य की क्रिया से जाना जाए, उसे कारक कहते हैं। कारक को प्रकट करने के लिए जिन जिहनों का प्रयोग किया जाता है, उसे कारक की विभक्तियाँ या परसर्ग कहते हैं। ‘पर’ का अर्थ है- बाद। कारक चिह्न संज्ञा या सर्वनाम के बाद लगते हैं; […]
अविकारी शब्द-अव्यय 8
अविकारी शब्द-अव्यय अविकारी शब्द वे होते हैं, जिनमें कोई विकार नहीं आता। वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा व सर्वनाम शब्दों के लिंग, वचन कारक आदि का इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसी कारण इन शब्दों को अव्यय भी कहा जाता है। अव्यय का शाब्दिक अर्थ है-जिसका कुछ भी व्यय न हो अर्थात ऐसे शब्द जिनका […]
अलंकार 8
अलंकार ‘अलंकार’ में दो शब्द मिले हैं – अलम + कार ‘अलम्’ का अर्थ है – भूषण या सजावट। इस प्रकार अलंकार का शाब्दिक अर्थ है – आभूषण अथवा जो अलंकृत या भूषित करे। इनके प्रयोग से भाषा चमत्कारी बनती है। ये भाषा में शब्द और अर्थ की दृष्टि से सौंदर्य उत्पन्न करते हैं। अलंकार […]